Wednesday, November 3, 2010

बात बीज की है...

बात बीज की है ...

चाहत का बीज है आकर्षण
प्रीत का बीज है अर्पण
सौंदर्य का बीज है दर्पण
समय का बीज है क्षण
दीपावली का बीज है श्रवण

न होता श्रवण कुमार
न सजती राम की लीला
न जलते दीप
न होता ज्योति का सिलसिला

श्रवण कुमार.. एक दीपक
जो अपने माँ बाप की ज्योति था
सारी रामायण का जनक वह
दीपावली का बीज था

जब बीज मिटने को तैयार हो जाये अंकुर उसी क्षण आ जाता है
बीज का बीज है - त्याग
श्रवण कुमार का त्याग रामायण की शुरुआत थी
तभी तो रामायण और दीपवाली त्याग से ओत-प्रोत हैं
श्रवण,दशरथ ,कौशल्या,राम,सीता,भरत,लक्ष्मण,हनुमान...
यहाँ तक की नन्हे दीपक भी त्याग का दर्शन देते हैं

"इस दीपावली अपने बीज को खोजें
श्रवण बने
एक त्याग करें
अपने दीपावली के बीज स्वय बने |"

-धरम सज्जन ट्रस्ट [ transliteration by - Adil Amir ]